शासन का नया सूत्रधारः शशि प्रकाश गोयल

ब्यूरो रिपोर्ट संतोष मिश्रा, लखनऊ से

जब ब्यूरोक्रेसी नेतृत्व की ऊंचाइयों को छूती है

उत्तर प्रदेश में नौकरशाही के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा गया है। 1989 बैच के टॉपर आईएएस अधिकारी शशि प्रकाश गोयल अब प्रदेश के नए मुख्य सचिव बनाए गए हैं। यह महज एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि योगी सरकार की राजनीतिक दिशा, केंद्र की नौकरशाही नीति और उत्तर प्रदेश के भविष्य की एक रणनीतिक चाल भी है।

शशि प्रकाश गोयल, जिन्हें एस.पी. गोयल के नाम से भी जाना जाता है, उत्तर प्रदेश के 1989 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और हाल ही में उन्हें राज्य का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है। उनका जन्म 20 जनवरी दिन शुक्रवार को सन 1967 में लखनऊ में हुआ था। उन्होंने बीएससी (ऑनर्स), एमसीए और आईआईएफटी से ईएमआईबी की पढ़ाई की है। 22 साल की उम्र में वर्ष 1989 में टॉपर आईएएस अधिकारी बने। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने इटावा में असिस्टेंट मजिस्ट्रेट के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने अलीगढ़, बहराइच और मेरठ में सीडीओ (मुख्य विकास अधिकारी) के रूप में कार्य किया। वह मथुरा, इटावा, प्रयागराज और देवरिया जैसे जिलों के जिलाधिकारी भी रह चुके हैं।

वर्ष 2014 में, जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने, तब शशि प्रकाश गोयल को भारत सरकार में संयुक्त सचिव बनाया गया। इस दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के अधीन मानव संसाधन मंत्रालय में अहम भूमिका निभाई। मंत्रालय के भीतर उन्होंने प्रभावशाली निर्णय लिए और कई नीतिगत मामलों में उनकी भूमिका निर्णायक मानी गई।

हालांकि, कुछ अंदर खाने के लोग उनके ऊपर उनकी ईमानदारी को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। कुछ अधिकारी उन्हें अत्यधिक ताकतवर और निर्णयों में एकतरफा भूमिका निभाने वाला मानते हैं। उनके अपने तर्क और तथ्य हो सकते हैं, लेकिन अब तक शशि प्रकाश गोयल के कार्यकाल में कोई बड़ा घोटाला या अनियमितता सामने नहीं आई है।

2017 में जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तो एस.पी. गोयल को मुख्यमंत्री का प्रमुख सचिव नियुक्त किया गया। वह पिछले लगभग आठ साल से मुख्यमंत्री कार्यालय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और मुख्यमंत्री के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने नागरिक उड्डयन, संपदा और प्रोटोकॉल जैसे विभागों का भी सफलतापूर्वक संचालन किया है। वर्ष 2020 में उन्हें अपर मुख्य सचिव के पद पर पदोन्नत किया गया।

योगी सरकार ने 3 जुलाई को केंद्र सरकार के नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग को पत्र लिखकर तत्कालीन मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह को सेवा विस्तार देने का आग्रह किया था। लेकिन केंद्र सरकार ने यह आग्रह अस्वीकार कर दिया। मोदी सरकार के कुछ ताकतवर मंत्रियों ने मनोज सिंह को सेवा विस्तार देने का विरोध किया था। 37 साल की सेवा के बाद मनोज सिंह 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो गए।

अब तक यह तय हो चुका है कि आगामी पंचायत और विधानसभा चुनाव में गोयल ही योगी के प्रमुख प्रशासकीय सारथी होंगे। इससे पहले डीजीपी प्रशांत कुमार को भी सेवा विस्तार नहीं मिला था और उनके स्थान पर योगी सरकार ने राजीव कृष्ण को डीजीपी बनाया।

मुख्य सचिव बनते ही मुख्यमंत्री कार्यालय की जिम्मेदारी संजय प्रसाद को दे दी गई है। संजय प्रसाद के पास पहले से ही प्रोटोकॉल, गृह, गोपन, बीजा-पासपोर्ट, सतर्कता और जनसंपर्क विभाग था, अब उनके पास प्रमुख सचिव राज्य सम्पत्ति एवं नागरिक उड्डयन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी रहेगा।

एस.पी. गोयल की नियुक्ति यह दर्शाती है कि योगी सरकार अब अगले चुनावों में प्रशासनिक रणनीति के लिए पूरी तरह अपने भरोसेमंद और अनुभवी अधिकारियों पर दांव लगाएगी।

अगर कोई युवा आईएएस या आईपीएस अधिकारी यह लेख पढ़ेगा, तो वह खुद से यह ज़रूर पूछेगा रणनीतिक भूमिका निभा सकता हूँ?” “क्या मैं भी इस स्तर की

क्योंकि शशि प्रकाश गोयल ने यह सिद्ध कर दिया है- बिना शोर किए भी इतिहास रचा जा सकता है।

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