संत कबीर नगर,
हाल ही में अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर हथियार आपूर्ति में अचानक तेज़ी लाकर एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी व्यापारिक प्रवृत्ति और अति महत्वाकांक्षा का प्रदर्शन किया है। ट्रंप को एक ‘व्यापारी राष्ट्रपति’ के रूप में पहले ही जाना जाता रहा है, लेकिन अब उनकी विदेश नीति में छिपी रणनीति केवल आर्थिक मुनाफा नहीं, बल्कि एक गहरे वैचारिक और सांस्कृतिक संघर्ष की ओर भी संकेत करती है। भारत को लेकर ट्रंप की सोच लंबे समय से संदेह के घेरे में रही है। उनके सलाहकारों द्वारा हाल ही में दिए गए कुछ वक्तव्यों में भारतीय ब्राह्मण समाज को लेकर की गई प्रत्यक्ष टिप्पणियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि ट्रंप और उनके रणनीतिकार भारत की पारंपरिक सनातन व्यवस्था, विशेषकर ब्राह्मणों की बौद्धिक और आध्यात्मिक भूमिका से असहज हैं। भारतीय ब्राह्मण केवल एक जाति नहीं, बल्कि एक चेतना हैं,जो समस्त मानवता के कल्याण, ज्ञान, और धर्म की रक्षा के लिए सदा से खड़े रहे हैं। चाहे वेदों का संकलन हो या भारतीय संविधान की वैचारिक नींव, ब्राह्मणों ने अपनी विद्वत्ता, संयम और तप से समाज को दिशा दी है। ऐसे में जब किसी वैश्विक शक्ति को ब्राह्मणों की विचारधारा से भय होता है, तो यह उसकी असुरक्षा और साजिशपूर्ण मानसिकता का प्रतीक है। ट्रंप की यह सोच “डीप स्टेट” के इस नेटवर्क का हिस्सा लगती है जो भारत में स्थिरता फैला कर न केवल धार्मिक टकराव बढ़ाना चाहता है बल्कि देश की सांस्कृतिक नींव को भी कमजोर करना चाहता है, भारत में ब्राह्मणों को बदनाम करना धार्मिक ध्रुवीकरण को हवा देना और अंततः देश को भीतर से कमजोर करना यह उन संतों का हिस्सा है जो किसी भी विदेशी शक्ति की “ड्राइव एंड रूल” नीति के अंतर्गत आते हैं। लेकिन ट्रंप शायद भूल जाते हैं कि भारतीय ब्राह्मण केवल ज्ञान के उपासक नहीं अभी तो धर्म और राष्ट्र रक्षा में भी सदैव अग्रणी रहे हैं। वीना केवल शास्त्र के ज्ञाता हैं बल्कि शस्त्र उठाने वाले गुरु वशिष्ठ, गुरु विश्वामित्र, गुरु सांदीपनि, चाणक्य और समर्थ रामदास भी इसी परंपरा से आते हैं। वह परा शक्तियों के जानकार होते हैं, उनकी चेतना विश्व की किसी भी गुप्त साजिश को भांप सकती है। यह केवल लेख नहीं, चेतावनी है उन ताकतों के लिए जो भारत को तोड़ने का सपना देखते हैं। कि जब तक भारत में ब्राह्मण चेतन जीवित है कोई भी ट्रंप कोई भी “डी,सी” नीति भारत को कमजोर नहीं कर सकती। भारतीय समाज को इस समय जागरूक और एकजुट रहना होगा धर्म जाति विचारधारा से उठकर देश की आत्मा की रक्षा करनी होगी जिसमें ब्राह्मण को भूमिका आज भी उतनी ही है जितनी वैदिक काल में थी।
