वित्तीय संकट का सामना करना पड़ सकता है ईमानदार पत्रकार को, राघवेंद्र त्रिपाठी, महामंत्री अखिल भारतीय पत्रकार महासभा

संतकबीर नगर /
पत्रकार अगर ईमानदारी से कार्य करें तो वह हमेशा संकटों से गिरा रहता है जिसमें सबसे अधिक प्रबलता आर्थिक संकट की हैऔर संघर्ष बहुत ज्यादा इमानदार पत्रकारिता करने वाला व्यक्ति जब किसी बड़े मीडिया समूह से जुड़ा नहीं होता और उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती है, तो परिवार का पालन-पोषण करना एक बड़ी चुनौती हो सकता है। पत्रकारों को जो सैलरी मिलती है, वह आमतौर पर बहुत कम होती है ज्यादातर पत्रकार अवैतनिक होते हैं, खासकर छोटे शहरों या कस्बों में। साथ ही, जब वे स्वतंत्र पत्रकार होते हैं, तो उनकी आय अस्थिर हो सकती है और कोई स्थिर वित्तीय स्रोत नहीं होता।
“मीडिया उद्योग का दबाव” मीडिया में कई बार वित्तीय या राजनीतिक दबाव पत्रकारिता की स्वतंत्रता को प्रभावित करते हैं। कई बार पत्रकारों को अपने मूल्यों को छोड़कर काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, ताकि वे रोजगार और अपनी आजीविका बनाए रख सकें। ऐसे में, इमानदारी से काम करने वालों को बहुत कठिनाइयाँ होती हैं। किसी भी पेशेवर व्यक्ति के लिए अपनी पारिवारिक जिम्मेदारी निभाने आवश्यक है।पत्रकार का परिवार होता है जिसकी जिम्मेदारी उसके कंधों पर होती है और उसको निभाना अत्यंत अनिवार्य हो जाता है अपनी नैतिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाना बहुत कठिन हो जाता है खासकर जब आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होती है तो यह और पेचीदा हो जाता है। अगर किसी पत्रकार बंधु के पास स्थिर नौकरी नहीं है तो उन्हें स्वतंत्र पत्रकारिता करते हुए विधिक तरीके से आर्थिक संसाधन जुटाना की जरूरत है इसके लिए फ्रीलांस लेखन, कंटेंट निर्माण, एवं छोटे-छोटे प्रोजेक्ट से ऊपर काम किया जा सकता है। पत्रकार बंधुओ के लिए कुछ संगठनों और सरकारी योजनाओं के तहत मदद भी उपलब्ध कराई जाती है लेकिन वह सिर्फ एक दिखावा मात्र है सरकार पत्रकारों में भेदभाव रखती है सरकार सिर्फ मान्यता प्राप्त पत्रकार को ही पत्रकार मानती है और उन्हें सुविधाएं प्रदान करती है गैर मान्यता प्राप्त एवं श्रमजीवी पत्रकार बंधुओ को किसी प्रकार की मदद सरकार द्वारा नहीं की जाती जो उनके कल्याण एवं उनके पारिवारिक कल्याण के लिए अत्यंत आवश्यक होता है। पत्रकार बंधुओ के कई ईमानदार संगठन इस पर कार्य कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी हो जाता है अपनी पारिवारिक स्थिति यदि परिवार का कोई अन्य सदस्य स्थिर नौकरी पर है तो उसे अपनी स्थिति बेहतर करने तक परिवार के लिए कुछ ना कुछ जिम्मेदारियां साझा करने की कोशिश करनी चाहिए लेकिन आज के जमाने में यह दुर्लभ हो चुका है। एक पत्रकार को अपने काम के प्रति ईमानदारी बनाए रखते हुए साथ ही अपने पेशेवर क्षमता और कौशल को निरंतर बढ़ाने की आवश्यकता है डिजिटल मीडिया सोशल मीडिया ब्लॉग लेखन या यूट्यूब चैनल जैसे नए प्लेटफार्म का उपयोग करके भी कुछ स्तर तक अपनी अपने जीवन शैली में सुधार कर सकते हैं लेकिन इसके लिए कठिन परिश्रम करना पड़ेगा और समय भी ज्यादा लगता है। इमानदार पत्रकारिता से जीवन यापन करना चुनौती पूर्ण हो सकता है लेकिन यह असंभव नहीं है। यदि कोई पत्रकार अपने मूल्य और आदर्शों पर खड़ा रहता है तो समय के साथ उसे उसके काम का उचित मूल्य और पहचान मिल सकती है इसके लिए पत्रकार बंधुओ को धैर्य निरंतर में महत्व और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता पड़ती है जो कि आजकल के समय में काम ही मिलता है।

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