गर्मी बढ़ी, बिजली घटती गई मेहदावल, सांथा, सेमरियावा, नाथनगर और धनघटा के लोग बेहाल…………………………………..
संत कबीर नगर 18 मई 2025,
इस वर्ष की भीषण गर्मी ने जहां जनजीवन को झुलसा कर रख दिया है, वहीं संत कबीर नगर जनपद में विद्युत आपूर्ति की बदहाल स्थिति ने लोगों की परेशानियों को कई गुना बढ़ा दिया है। मेहदावल, सांथा, सेमरियावा, नाथनगर और धनघटा जैसे प्रमुख विकास खंडों में अघोषित बिजली कटौती अब एक आम बात बन चुकी है। घंटों की बिजली कटौती, बिना किसी पूर्व सूचना के, विभागीय लापरवाही की सबसे बड़ी मिसाल बन चुकी है। ग्रामीण क्षेत्रों में दिन के समय 6 से 8 घंटे तक बिजली गुल रहना अब आम हो गया है। कभी-कभी तो रातभर भी बिजली नहीं आती, जिससे बच्चों की पढ़ाई, किसानों की सिचाई, दुकानदारों की बिक्री और मरीजों की देखरेख तक बाधित हो रही है। नाथनगर और धनघटा क्षेत्र में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, जहां अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी निर्बाध बिजली नहीं मिल पा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभागीय कर्मचारी कई मामलों में काम करने के एवज में “गुप्त लेनदेन” की मांग करते हैं। सेमरियावां और मेहदावल के ग्रामीणों ने नाम ने छापने की शर्त पर बताया की नई कनेक्शन, ट्रांसफार्मर बदलने और बल सुधार जैसे सामान्य कार्यों के लिए भी रिश्वत मांगी जाती है। ऐसे में प्रतीत होता है कि बिजली विभाग अब सेवा प्रदाता में होकर “सौदेबाज तंत्र” में तब्दील हो गया है। साथा क्षेत्र के दर्जनों गांव में तो स्थिति और भी जटिल है। विश्वासपात्र सूत्रों के अनुसार हर बार चुनाव में पहले वादों की झड़ी और चुनाव के बाद सन्नाटा ही देखने को मिलता है। जनप्रतिनिधि बिजली कटौती पर सवाल उठने से कतराते हैं और विपक्ष मौन रहता है। इसका सीधा फायदा बिजली विभाग को मिलता है जो बिना जवाब देही के बिजली व्यवस्था को मनमानी ढंग से चला रहे हैं। अगर लोगों कि माने तो अब जनता का धैर्य जवाब दे रहा है जनपद के सभी करो के नागरिक एक और में कह रहे हैं कि यदि जल्द से जल्द विद्युत व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो वृहद आंदोलन और विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपननाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता यह सिर्फ बिजली का मुद्दा नहीं है बल्कि यह जनता के संवैधानिक अधिकार, सुशासन और सम्मान का प्रश्न बना हुआ है। प्रशासन और शान दोनों को मिलकर इस विकराल समस्या का तत्काल समाधान निकालना चाहिए हर गांव और कस्बे में बिजली की नियमित आपूर्ति शिकायतों का त्वरित निवारण और सबसे जरूरी रिश्वतखोरी पर कठोर कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। आम जनमानस सिर्फ शिकायत कर्ता मात्र बनकर रह गया है उसके शिकायतों का ना तो उचित जवाब मिलता है और ना तो चित्रण,
