रानी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती कार्यक्रम में मातृशक्ति की रही विशेष उपस्थिति

रानी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती कार्यक्रम में मातृशक्ति की रही विशेष उपस्थिति

बस्ती। बस्ती सदर ब्लॉक सभागार में शुक्रवार को रानी अहिल्याबाई होल्कर जी की जयंती के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व ब्लॉक प्रमुख श्री राकेश श्रीवास्तव जी ने किया, जिनके प्रयास से आयोजन सफल और प्रभावशाली रहा।

इस विशेष अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे
पूर्व दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री व महराजगंज जिले के भाजपा प्रभारी राम जियावन मौर्य ने रानी अहिल्याबाई होल्कर के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा, “रानी अहिल्याबाई होल्कर नारी सशक्तिकरण की प्रतीक थीं। उन्होंने जिस साहस, न्यायप्रियता और सामाजिक समरसता का परिचय दिया, वह आज भी प्रासंगिक है। वर्तमान पीढ़ी को उनके जीवन मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता है।”

विशिष्ट अतिथि भाजपा वरिष्ठ नेता राजेन्द्र गौड़ ने रानी अहिल्याबाई के प्रशासनिक कौशल और धार्मिक सहिष्णुता को याद करते हुए कहा, “उनकी शासन पद्धति भारतीय इतिहास में आदर्श के रूप में जानी जाती है। उन्होंने महिला नेतृत्व की मिसाल कायम की, जिसे हमें समाज में व्यापक रूप से स्थापित करना होगा।”

मुख्य वक्ता चंदा श्रीवास्तव ने रानी अहिल्याबाई के आध्यात्मिक पक्ष और जनसेवा भावना पर प्रकाश डालते हुए कहा, “रानी अहिल्याबाई न केवल एक शक्तिशाली शासक थीं, बल्कि उन्होंने समाज के हर वर्ग को न्याय और सम्मान देने का कार्य किया। आज उनकी जयंती पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम समाज में समानता, शिक्षा और संस्कृति को बढ़ावा देंगे।”
कार्यक्रम का संचालन अमृत कुमार वर्मा ने किया।
इस मौके पर अभिनव उपाध्याय, दिलीप भट्ट, दीपक उपाध्याय, गौरव पाल, राज नारायण शुक्ल, सहज राम, राजकुमार गौतम, सुनील शर्मा, प्रियंका चौधरी, अखिलेश शुक्ल, फैज अहमद, अजय कुमार, दिनेश शुक्ल, नेहा, सत्रुधन, सुनील सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
विशेष उल्लेखनीय बात यह रही कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मातृशक्ति की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। सभी ने रानी अहिल्याबाई होल्कर के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
अंत में ब्लॉक प्रमुख राकेश श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, ऐसे आयोजनों से समाज में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की प्रेरणा को जीवित रखा जा सकता है और युवाओं को राष्ट्रनिर्माण में भागीदारी हेतु प्रेरित किया जा सकता है।

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