ब्यूरो रिपोर्ट संतोष मिश्रा लखनऊ
गोण्डा-जनपद से इस श्रावण मास की एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने न केवल एक पूरे परिवार को निगल लिया, बल्कि पूरे जिले और प्रदेश को शोक में डुबो दिया।कभी-कभी कोई खबर पत्रकार नहीं लिखता — वो ख़ुद लिखी जाती है आंसुओं से, शवों की कतारों से, और उस मौन से जो मातम के बीच भी चीत्कार करता है।

आज रविवार, 3 अगस्त 2025 को रविवार की सुबह जब अधिकतर लोग सोकर उठे भी नहीं थे, तब मोतीगंज थाना क्षेत्र के सीहागांव गांव के 15 श्रद्धालु सावन की श्रद्धा के साथ पृथ्वीनाथ मंदिर में जलाभिषेक को निकले थे। उन्हें क्या पता था कि यह दिन न केवल छुट्टी का दिन है, बल्कि उनके जीवन का अंतिम दिन भी हो सकता है।सुबह लगभग 7 से 8 बजे के बीच, जब श्रद्धालुओं का एक दल अपने गांव सीहागांव (थाना मोतीगंज) से भगवान भोलेनाथ के प्राचीन मंदिर-पृथ्वीनाथ धाम, जलाभिषेक हेतु निकला था, तब किसी को भी यह अंदेशा नहीं था कि यह यात्रा कभी पूरी नहीं होगी। श्रद्धा से भरी यह यात्रा असमय काल में विलीन हो जाएगी।श्रद्धा के साथ रवाना हुई एक बोलेरो, परिवार का जनसंपर्क नहीं, बल्कि अंतिम संसर्ग लेकर लौटी। यह खबर केवल एक हृदयविदारक दुर्घटना नहीं है बल्कि यह सावन की श्रद्धा से जन्मे, मृत्यु के सबसे करुण दृश्य की रिपोर्ट है।आज का रविवार, जो अवकाश का दिन था – एक ऐसा दिन जिसे परिवार के लोग भगवान शिव के दर्शन के लिए समर्पित करना चाहते थे -अब सीहागांव गांव के लिए इतिहास बन चुका है। एक ऐसा इतिहास, जिसे लोग याद रखना नहीं चाहेंगे बल्कि भूलना चाहेंगे।“काश… समय रहते कोई टोक देता, कोई रोक देता, तो शायद आज आरव खेल रहा होता, नेहा पूजा की थाली सजा रही होती, और कविता अपने विवाह के सपने देख रही होती…” घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही से उपजा मानव जनित अपराध है।श्रद्धालु बोलेरो गाड़ी में सवार होकर रवाना हुए थे, जिसमें कुल 15 लोग बैठे थे, जबकि बोलेरो वाहन की अधिकतम क्षमता केवल 7 सवारियों की होती है। यह एक अत्यंत चिंताजनक बात है कि वाहन स्वामी नन्दलाल वर्मा और चालक लल्लू (जो हादसे में जीवित बच गया है) की लापरवाही ने इस भीषण त्रासदी को जन्म दिया। गाड़ी जब देवरिया अलावाल-पारासराय इटियाथोक मार्ग पर बेलवा बहुता के रेहरा गाँव के पास स्थित सरयू नहर पुल पर पहुंची, जो थाना क्षेत्र इटियाथोक के अंतर्गत आता है, तो चालक नियंत्रण खो बैठा। तेज गति में, अधिक वजन से दबा वाहन अचानक अनियंत्रित हो गया और नहर में जा गिरा। यह दृश्य इतना हृदयविदारक था कि जिसने भी देखा, उसकी आत्मा कांप उठी। स्थानीय ग्रामीण, प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमों ने तत्परता से बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जल में डूबकर 11 लोगों की मृत्यु हो गई, और एक व्यक्ति अब भी लापता है। मृतकों में से 9 लोग एक ही परिवार से थे। यह परिवार प्रहलाद गुप्ता का था, जो एक निजी विद्यालय- स्व. रामदेव मेमोरियल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय – के प्रबंधक हैं। उनके परिजन और निकटवर्ती रिश्तेदारों की यह यात्रा एक सामूहिक चिता में बदल गई। ये सभी पृथ्वीनाथ मंदिर, खरगूपुर क्षेत्र में भगवान शिव का जलाभिषेक करने जा रहे थे। मृत्यु की इस कठोर छाया ने गांव सीहागांव में एक साथ कई घरों को सूना कर दिया। दुःखद रूप से जिन 11 लोगों की जान गई, उनके नाम इस प्रकार हैं:उनके नाम हैं:
रामबेटी (60 वर्ष), सरोजा देवी (58 वर्ष), राजू (30 वर्ष), नरेंद्र (32 वर्ष), पंकज (28 वर्ष), आरती (25 वर्ष), गुड़िया (22 वर्ष), आरव (5 वर्ष), कविता (18 वर्ष), रिंकू (35 वर्ष), और नेहा (12 वर्ष)।
इनमें छोटे बच्चे से लेकर वृद्ध तक शामिल हैं-मानो एक पूरी पीढ़ी काल के गाल में समा गई हो। श्रद्धा के उत्साह में जब विवेक और सतर्कता को भुला दिया जाता है, तब ऐसे हादसे होते हैं। यह केवल एक दुर्घटना नहीं है -यह व्यवस्था, सामाजिक चेतना और जिम्मेदारियों की सामूहिक विफलता है।श्रद्धा का मार्ग संयम और जिम्मेदारी से ही सुरक्षित होता है।अविवेक और लापरवाही की कीमत ज़िंदगी से चुकानी पड़ती है और इसका भयावह उदहारण ये हृदयविदारक घटना है। एक ही परिवार और गाँव के 11 लोगों के अंतिम संस्कार का ये एक असहनीय दृश्य भी होगा जिसकी परिकल्पना लोगों ने सपने मे भी नहीं किया होगा। गोण्डा के पुलिस अधीक्षक विनीत जयसवाल ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को ₹5-5 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन और पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। “जिस जल को भोलेनाथ को चढ़ाना था, उसी में वे स्वयं समा गए”-यह वाक्य सीहागांव के एक वृद्ध ने डबडबाई आंखों से कहा और पूरा गांव सिसक उठा।“यह हादसा नहीं, असंवेदनशीलता से उपजा एक बड़ा ”शोक”है। यह घटना हम सबको यह याद दिलाती है कि श्रद्धा, नियमों की अवहेलना का बहाना नहीं बन सकती।
हर बार “भगवान” नहीं बचाते-कई बार वो स्वयं घटना के साक्षी भी बन जाते हैं-सिवाय उन चूकों के, जिनसे हमने कुछ सीखा ही नहीं।यात्रियों को कमज़ोर वाहन सुरक्षा के भरोसे छोड़ देना
ये सब बातें अब सिर्फ तकनीकी जांच का हिस्सा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और उत्तरदायित्व की सार्वजनिक परीक्षा बन चुकी हैं।यह दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही से उपजी सामूहिक मृत्यु है।
इस दुर्घटना पर मेहनौन विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक विनय कुमार द्विवेदी उर्फ मुन्ना भैया, गोण्डा सांसद व केंद्रीय मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह, गोण्डा सदर के भाजपा विधायक प्रतीक भूषण सिंह, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, भाजपा के वरिष्ठ नेता आशुतोष सिंह उर्फ पप्पू भैया सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों से जुड़े व्यक्तियों और आम जनमानस ने गहरा शोक प्रकट किया है। घटनास्थल पर तत्काल पहुंच कर स्थिति को नियंत्रित करने में इटियाथोक थानाध्यक्ष के.जी. राय और उनकी पुलिस टीम का कार्य अत्यंत सराहनीय रहा।और सबसे बड़ा सवाल -क्यों हम बार-बार लापरवाहियों को “किस्मत” का नाम देकर आगे बढ़ जाते हैं?
-संतोष मिश्रा, पत्रकार, लखनऊ
