संत कबीर नगर ,
श्री गणेश चतुर्थी, भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो न केवल धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है, बल्कि आत्मिक शुद्धता, सकारात्मक ऊर्जा और शुभारंभ की भावना को भी जाग्रत करता है। यह पर्व भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है और इसे ‘विनायक चतुर्थी’ या ‘कल्याणकारी चतुर्थी’ के नाम से भी जाना जाता है। भगवान श्री गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ और ‘सिद्धिविनायक’ कहा जाता है, अर्थात् वे समस्त विघ्नों का हरण करने वाले और सभी कार्यों को सफलता प्रदान करने वाले देवता हैं। वे ही प्रथम पूज्य हैं, किसी भी पूजा, अनुष्ठान या कार्य का श्रीगणेश उन्हीं के नाम से किया जाता है। उनके नाम के बिना कोई भी मंगल कार्य अधूरा माना जाता है। उनकी बुद्धि, विवेक और व्यवहारिकता उन्हें देवों में ‘ज्ञान के प्रतीक’ के रूप में प्रतिष्ठित करती है। श्री गणेश के स्वरूप का भी गहरा आध्यात्मिक और सांकेतिक अर्थ है।उनका बड़ा मस्तक विवेक और ज्ञान का प्रतीक है, छोटे नेत्र सूक्ष्म दृष्टि का संकेत करते हैं, विशाल कान सबकी सुनने की प्रेरणा देते हैं, जबकि छोटी आंखें लक्ष्य पर एकाग्रता का बोध कराती हैं। उनका पेट विशाल है जो जीवन की हर अच्छी-बुरी बात को आत्मसात करने की क्षमता का प्रतीक है। श्री गणेश चतुर्थी का पर्व विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अनेक हिस्सों में धूमधाम से मनाया जाता है। घर-घर मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में श्री गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। भक्तगण 10 दिनों तक पूजन अर्चन, व्रत, भजन_ कीर्तन और सांस्कृतिक आयोजन करते हैं। इस पर्व की लोकप्रियता अब वैश्विक हो चुकी है विदेश में भी बसे भारतीय भी इसे पूरे उत्साह से मनाते हैं। श्री गणपति उत्सव का आरंभ लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में सार्वजनिक रूप से किया था ताकि समाज में राष्ट्रीय चेतना फैलने में कोई कमी ना रहे जिससे आप जनमानस में एकता की भावना जागृत हो। तब से लेकर आज तक श्री गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन चुकी है। इस अवसर पर अखिल भारतीय पत्रकार महासभा (रजि0) के राष्ट्रीय महामंत्री राघवेंद्र त्रिपाठी ने समस्त देशवासियों, प्रदेशवासियों जनपद वीडियो सहित समस्त जीव जगत को श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह सभी के जीवन से विघ्नों का नाश करें और सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य एवं शांति प्रदान करें। आज के समय में जब समाज विषमताओं, तनाव और चुनौतियों से जूझ रहा है ऐसे समय में श्री गणेश की उपासना हमें धैर्य विवेक और समाधान की राह दिखाती है। उनकी उपासना हमारे जीवन में शुभारंभ, सफलता और संस्कारों का प्रतीक है।
