इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं का आंदोलन तेज, पांच प्रमुख मांगों को लेकर उठी आवाज


प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं द्वारा लंबे समय से लंबित पांच महत्वपूर्ण मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन जारी है। इस आंदोलन में अधिवक्ता प्रशांत सिंह (रिंकू सिंह), वरिष्ठ अधिवक्ता हरवंश सिंह और अधिवक्ता आशुतोष त्रिपाठी समेत कई प्रमुख अधिवक्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही है।
दिनांक 13 अप्रैल 2026 को वरिष्ठ अधिवक्ता स्वर्गीय वी.सी. मिश्रा की पुण्यतिथि पर हाईकोर्ट परिसर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे पूरे दिन बैठक और प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस दौरान अधिवक्ता सुनील कुमार शुक्ल भी मौजूद रहे, जो राष्ट्रीय मानवाधिकार एसोसिएशन के नेशनल लीगल सेक्रेटरी हैं।
अधिवक्ता सुनील कुमार शुक्ल ने एसोसिएशन के चेयरपर्सन कुलदीप मिश्रा से आग्रह किया कि केंद्र और राज्य सरकार को अधिवक्ताओं की मांगों से अवगत कराया जाए, ताकि न्यायिक व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए अधिवक्ताओं की समस्याओं का समाधान हो सके। उनका कहना है कि इससे न केवल अधिवक्ताओं को राहत मिलेगी बल्कि आम जनता को भी त्वरित न्याय मिल सकेगा और न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या कम होगी।
अधिवक्ताओं की पांच प्रमुख मांगें:
सभी अधिवक्ताओं के लिए 10 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू की जाए।
हाईकोर्ट परिसर में नवनिर्मित अधिवक्ता चेंबरों का आवंटन न्यूनतम शुल्क पर किया जाए।
न्यायिक प्रणाली में एकरूपता लाई जाए, जजों के बैठने का समय तय हो तथा जजों की संख्या बढ़ाई जाए।
मुकदमों की लिस्टिंग प्रणाली में व्याप्त खामियों को दूर किया जाए।
हाईकोर्ट में अन्य राज्यों से जजों की नियुक्ति न की जाए, स्थानीय अधिवक्ताओं को प्राथमिकता मिले।
विशेष मांग:
अधिवक्ताओं ने यह भी मांग उठाई है कि जनहित में कार्य करने वाले अधिवक्ताओं को टोल टैक्स से मुक्त किया जाए, क्योंकि उन्हें अपने क्लाइंट्स से मिलने के लिए हर मौसम में चार पहिया वाहन से यात्रा करनी पड़ती है। यह मांग अधिवक्ता प्रदीप देवघर तिवारी द्वारा लगातार उठाई जा रही है।
अधिवक्ताओं का कहना है कि इन मांगों के पूरा होने से न्याय व्यवस्था मजबूत होगी और देश के विकास में न्यायपालिका की भूमिका और प्रभावी बनेगी।

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