धान की फसल में पोषक तत्व एवं खरपतवार प्रबंधन पर किसानों को दी गई वैज्ञानिक सलाह : डॉ. एस. के. तोमर

नगर बाजार (बस्ती)। खरीफ मौसम में धान की अच्छी पैदावार के लिए उन्नत बीज एवं प्रजाति के साथ-साथ संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और समय पर खरपतवार नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है। यह जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एस. के. तोमर ने किसानों को दी।

उन्होंने बताया कि बेहतर उत्पादन के लिए प्रति एकड़ रोपाई या बुवाई के समय 50 किलोग्राम डीएपी एवं 27 किलोग्राम पोटाश का प्रयोग करें। नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए 100 किलोग्राम यूरिया को तीन बराबर चरणों में दें। पहली मात्रा रोपाई के 12–14 दिन बाद 30 किलोग्राम, दूसरी कल्ले बनने के समय 40 किलोग्राम तथा तीसरी बाली निकलने के समय 30 किलोग्राम डालें। आवश्यकता अनुसार 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति एकड़ का भी प्रयोग करें।

डॉ. तोमर ने बताया कि धान के खेत में संवई, डबरा, कनकौआ, लेप्टोक्लोवा चाइनेन्सिस, दूब आदि खरपतवार फसल के साथ प्रतिस्पर्धा कर पोषक तत्वों का अत्यधिक शोषण करते हैं। खरपतवार धान की फसल की तुलना में 5 से 10 गुना अधिक पोषक तत्व ग्रहण कर उपज को प्रभावित करते हैं। इसलिए समय पर उनका नियंत्रण करना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने सलाह दी कि रोपाई वाले धान में रोपाई के 3 से 5 दिन के भीतर प्रीटिलाक्लोर (Pretilachlor) 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ का छिड़काव खेत में पर्याप्त नमी की स्थिति में करें। इसके लगभग 30 दिन बाद यदि खरपतवार दिखाई दें तो बिस्पाइरिबैक सोडियम (Bispyribac Sodium) 100 मिलीलीटर के साथ 8 ग्राम ऑलमिक्स को 150 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें तथा एक दिन बाद सिंचाई अवश्य करें।

यदि खेत में लेप्टोक्लोवा चाइनेन्सिस का प्रकोप हो तो रोपाई के 25 दिन बाद फेनॉक्साप्रॉप-पी-एथाइल (Fenoxaprop-P-ethyl) 449 मिलीलीटर को 150 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। उन्होंने छिड़काव के लिए फ्लड जेट या फ्लैट फैन नोजल के प्रयोग की सलाह दी।

डॉ. तोमर ने कहा कि समय पर खरपतवार प्रबंधन ही धान की अधिक उपज और बेहतर उत्पादन का मूल मंत्र है।

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