मोबाइल की लत बना रही है युवा पीढ़ी को मानसिक और शारीरिक रोगी

संत कबीर नगर
आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। संचार, शिक्षा, व्यवसाय और मनोरंजन के क्षेत्र में इसकी उपयोगिता निस्संदेह है, लेकिन इसकी अति ने समाज को गंभीर संकट में डाल दिया है, विशेषकर विद्यार्थियों, युवाओं और आम जनमानस को।मोबाइल की अत्यधिक लत ने विद्यार्थियों की एकाग्रता को बुरी तरह प्रभावित किया है। घंटों तक मोबाइल पर गेम खेलना, सोशल मीडिया स्क्रॉल करना और रात-रात भर चैटिंग करना पढ़ाई से ध्यान भटका रहा है। इससे न केवल उनके शैक्षणिक परिणाम प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि आंखों की रोशनी, नींद की गुणवत्ता और मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। मोबाइल का दुरुपयोग युवाओं को तेजी से वर्चुअल दुनिया की ओर खींच रहा है। इंस्टाग्राम, फेसबुक, रील्स और शॉर्ट वीडियो एप्स ने युवा पीढ़ी को दिखावे और झूठी प्रतिस्पर्धा में उलझा दिया है। इससे उनमें आत्ममूल्यांकन की भावना खत्म हो रही है, अवसाद और हीनभावना बढ़ रही है, और कई बार आत्मघाती प्रवृत्तियां भी जन्म ले रही हैं। मोबाइल पर अत्यधिक निर्भरता के कारण पारिवारिक संवाद और सामाजिक मेलजोल में भारी गिरावट आई है। बच्चे माता-पिता से काटने लगे, पति-पत्नी के बीच संवाद कब हुआ है और दोनों के साथ मिलने सुनने का चलन भी खत्म हो जा रहा है सब लोग एक ही घर में एक दूसरे से दूर होते जा रहे हैं जो अत्यंत चिंतनीय है। मोबाइल की रोशनी से आंखों पर दबाव बढ़ता है देर तक स्क्रीन देखने से सिर दर्द अनिद्रा रन की हड्डी में दर्द और मोटापा जैसी समस्याएं आम हो चुकी है, इसके अलावा रेडिएशन के कारण दीर्घकालिक स्वास्थ्य खराबी के भी मामले सामने आ रहे हैं। समाज अभिभावको, और शिक्षकों को मिलकर इस दिशा में प्रयास करना होगा। मोबाइल की सीमित और सकारात्मक उपयोग को बढ़ावा देना होगा। साइबर क्राइम कंट्रोल विभाग हर गतिविधि पर तत्काल एक्शन लेना बहुत जरूरी होगा समाज के हित के लिए, बच्चों को खुला वातावरण खेलकूद पुस्तक और रचनात्मक गतिविधियां देनी होगी ताकि वे वर्चुअल दुनिया से बाहर आकर असली जीवन में जिए। मोबाइल एक साधन है साध्य नहीं, यदि इसका संतुलित उपयोग किया जाए तो यह वरदान है अन्यथा आने वाले समय में यह पीढ़ियों को खोखला कर सकता है। बहुत जरूरी है कि हम मोबाइल को जीवन पर हावी न होने दे बल्कि जीवन को मोबाइल से ऊपर रखें तभी समाज का समुचित रचनात्मक विकास हो पाएगा इसमें साइबर क्राइम विभाग जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है क्योंकि आजकल सोशल मीडिया के माध्यम से तरह-तरह की अश्लीलता एवं रील के माध्यम से तरह-तरह से भ्रामक पोस्ट आमजनमानस के लिए घातक हैं।

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