उत्तर प्रदेश निर्मित मदिरा उद्योग की प्रगति, मनीष अग्रवाल प्रबंध निदेशक सुपीरियर इंडस्ट्रीज लिमिटेड

संत कबीर नगर 19 अगस्त 2025,
उत्तर प्रदेश सरकार और आबकारी विभाग की दूरदर्शी नीतियों के चलते प्रदेश का मदिरा उद्योग नए स्वर्णिम युग की दहलीज पर पहुंच गया है। यह उद्योग न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में लखनऊ में आयोजित प्रथम Excise Investors’ Summit में ₹39,479 करोड़ के 135 एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अलावा, ₹4,320 करोड़ के निवेश प्रस्ताव और 73,524 नए रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में मदिरा उद्योग की उत्पादन क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2017-18 में प्रदेश में 61 डिस्टिलरी थीं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 170 बिलियन लीटर थी। वर्ष 2022-23 में यह संख्या बढ़कर 85 डिस्टिलरी हो गई है, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता 348 बिलियन लीटर है, जो 15% की वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है।
उत्तर प्रदेश का मदिरा उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। वर्ष 2017-18 में प्रदेश से 292.78 मिलियन लीटर मदिरा का निर्यात हुआ था, जो वर्ष 2022-23 में बढ़कर 743.53 मिलियन लीटर हो गया, जो 155% की वृद्धि को दर्शाता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मदिरा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। नए बाजार: सरकार ने यूरोप, उत्तर अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीका जैसे नए बाजारों में प्रवेश करने की संभावनाएं तलाशी हैं।
ई-गवर्नेंस: ऑनलाइन लाइसेंसिंग और सिंगल-विंडो क्लियरेंस जैसी नीतियों के माध्यम से उद्योग को और अधिक सुगम बनाया जा रहा है।
आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश का मदिरा उद्योग और भी उज्ज्वल संभावनाओं के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार है। वर्ष 2025-26 में 1,000 मिलियन लीटर से अधिक मदिरा के निर्यात की संभावना है। इसके अलावा, APEDA और UPDA की संयुक्त पहल से 2030 तक मदिरा निर्यात को US$ 370.5 मिलियन से US$ 1 बिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

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