2082 भाद्र 23: नेपाल का काला दिन,19 जेन-ज़ी युवाओं की शहादत पर देश रोया, टाइगर राणा

मानवाधिकार और शांति फाउंडेशन नेपाल की अपील………………………………

राघवेंद्र त्रिपाठी

संत कबीर नगर 10 सितंबर 2025,
ज्ञानेंद्र राणा “टाइगर” का वक्तव्य,
नेपाली/भारतीय रविंद्र आर्य से प्राप्त जानकारी के अनुसार नेपाल की मौजूदा परिस्थिति ने पूरे राष्ट्र को गहरे सदमे में डाल दिया है। 2082 भाद्र 23 (8 सितंबर 2025) को 19 निर्दोष जेन-ज़ी (Gen-Z) युवाओं की गोलीकांड में शहादत ने देश के हर नागरिक को झकझोर दिया। आंदोलनकारी युवाओं पर ओली सरकार की ओर से की गई सीधी गोलीबारी को न केवल अमानवीय बल्कि लोकतंत्र और मानवाधिकार का घोर उल्लंघन माना जा रहा है। मानवाधिकार और शांति फाउंडेशन नेपाल का कहना है कि इन युवाओं के पास न कोई हथियार थे और न ही वे हिंसा में शामिल थे। इसके बावजूद उन्हें गोलियों का निशाना बनाया गया। संगठन का मानना है कि,किसी भी आम नागरिक या आंदोलनकारी पर मुकदमा दर्ज न किया जाए। वर्तमान राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए सभी को आम माफी दी जाए। जनता को सरकार की गलतियों का खामियाजा न भुगतना पड़े। ओली सरकार की भ्रष्ट और दमनकारी नीतियों की जवाबदेही तय हो तथा मानवाधिकार आयोग तत्काल जांच करे। नेपाली सेना के जनरल द्वारा गोली चलाने के आदेश को अस्वीकार कर इस्तीफा देना लोकतांत्रिक परंपरा का प्रतीक है। यदि सेना ओली सरकार का साथ देती, तो नेपाल और भी भयावह नरसंहार का गवाह बनता। प्रधानमंत्री कार्यालय और जिम्मेदार मंत्रियों को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अभी सबको इस्तीफा देना चाहिए। यही कदम जनता के आक्रोश को शांत कर सकता है। झापेन्द्र राणा ‘टाइगर’ ने इन वीर युवाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “इन महावीर युवाओं की शहादत ने पूरे देश को रुला दिया है। यह केवल जेन-ज़ी की नहीं, बल्कि पूरे नेपाल की आवाज़ है। ”उन्होंने आरोप लगाया कि नेपाल पहले ही माओवादी आंदोलन, भूकंप और कोविड जैसी आपदाओं से उबर रहा था। ऐसे में इस शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक बनाने में स्वार्थी नेताओं और बाहरी शक्तियों की बड़ी भूमिका रही। राणा ने कहा कि जिस देश में नारायणहिटी दरबार कांड, जननेता मदन भंडारी की रहस्यमयी मौत, निर्मला हत्या कांड और सोना तस्करी जैसे मामलों में आज तक न्याय नहीं मिला, वहां इस त्रासदी पर निष्पक्ष जांच होना जनता के लिए सपना जैसा है। आंदोलन के संयोजकों ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण था, लेकिन कुछ अराजक तत्वों ने घुसपैठ कर हालात बिगाड़ दिए। राणा ने चेतावनी दी कि नेपाल के दुश्मन केवल बाहर नहीं बल्कि भीतर भी मौजूद हैं। राणा ने युवाओं से अपील की कि वे संयम बरतें और अपने असली शत्रुओं को पहचानें। उन्होंने कहा,देश का धन और जनहानि किसी भी आंदोलन की सफलता नहीं है। समस्या का समाधान वार्ता से होना चाहिए। हर राजनीतिक बदलाव पुराने भ्रष्ट नेताओं को नए रूप में सामने लाता है, इसलिए नए जेनरेशन को सजग रहना होगा। ”अंत में उन्होंने युवाओं का आह्वान किया, “नेपाल को फिर से गौतम बुद्ध की भूमि, शांति का अग्रदूत बनाना होगा। 2082 भाद्र 23: नेपाल का काला दिन, 19 जेन-ज़ी युवाओं की शहादत पर देश रोया,टाइगर राणा नेपाल की मौजूदा परिस्थिति ने पूरे राष्ट्र को गहरे सदमे में डाल दिया है। 2082 भाद्र 23 (08 सितंबर 2025) को 19 निर्दोष जेन-ज़ी (Gen-Z) युवाओं की गोलीकांड में शहादत ने देश के हर नागरिक को झकझोर दिया। आंदोलनकारी युवाओं पर ओली सरकार की ओर से की गई सीधी गोलीबारी को न केवल अमानवीय बल्कि लोकतंत्र और मानवाधिकार का घोर उल्लंघन माना जा रहा है। मानवाधिकार और शांति फाउंडेशन नेपाल का कहना है कि इन युवाओं के पास न कोई हथियार थे और न ही वे हिंसा में शामिल थे। इसके बावजूद उन्हें गोलियों का निशाना बनाया गया। संगठन का मानना है कि, किसी भी आम नागरिक या आंदोलनकारी पर मुकदमा दर्ज न किया जाए। वर्तमान राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए सभी को आम माफी दी जाए। जनता को सरकार की गलतियों का खामियाजा न भुगतना पड़े। ओली सरकार की भ्रष्ट और दमनकारी नीतियों की जवाबदेही तय हो तथा मानवाधिकार आयोग तत्काल जांच करे। नेपाली सेना के जनरल द्वारा गोली चलाने के आदेश को अस्वीकार कर इस्तीफा देना लोकतांत्रिक परंपरा का प्रतीक है। यदि सेना ओली सरकार का साथ देती, तो नेपाल और भी भयावह नरसंहार का गवाह बनता। प्रधानमंत्री कार्यालय और जिम्मेदार मंत्रियों को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अभी सबको इस्तीफा देना चाहिए। यही कदम जनता के आक्रोश को शांत कर सकता है। झापेन्द्र राणा ‘टाइगर’ ने इन वीर युवाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा,“इन महावीर युवाओं की शहादत ने पूरे देश को रुला दिया है। यह केवल जेन-ज़ी की नहीं, बल्कि पूरे नेपाल की आवाज़ है।” उन्होंने आरोप लगाया कि नेपाल पहले ही माओवादी आंदोलन, भूकंप और कोविड जैसी आपदाओं से उबर रहा था। ऐसे में इस शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक बनाने में स्वार्थी नेताओं और बाहरी शक्तियों की बड़ी भूमिका रही। राणा ने कहा कि जिस देश में नारायणहिटी दरबार कांड, जननेता मदन भंडारी की रहस्यमयी मौत, निर्मला हत्या कांड और सोना तस्करी जैसे मामलों में आज तक न्याय नहीं मिला, वहां इस त्रासदी पर निष्पक्ष जांच होना जनता के लिए सपना जैसा है। आंदोलन के संयोजकों ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण था, लेकिन कुछ अराजक तत्वों ने घुसपैठ कर हालात बिगाड़ दिए। राणा ने चेतावनी दी कि नेपाल के दुश्मन केवल बाहर नहीं बल्कि भीतर भी मौजूद हैं। राणा ने युवाओं से अपील की कि वे संयम बरतें और अपने असली शत्रुओं को पहचानें। उन्होंने कहा,“देश का धन और जनहानि किसी भी आंदोलन की सफलता नहीं है। समस्या का समाधान वार्ता से होना चाहिए। हर राजनीतिक बदलाव पुराने भ्रष्ट नेताओं को नए रूप में सामने लाता है, इसलिए नए जेनरेशन को सजग रहना होगा।”अंत में उन्होंने युवाओं का आह्वान किया, “नेपाल को फिर से गौतम बुद्ध की भूमि, शांति का अग्रदूत बनाना होगा। जय नेपाल, जय जेन,ज़ी, जय युवा। यही पीढ़ी सुखी, शांत और समृद्ध नेपाल का निर्माण करेगी।”

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