संत कबीर नगर 02 दिसंबर 2025,
लोकतंत्र की सबसे बुनियादी और मजबूत नींव है, सशक्त मतदाता सूची। भारत सरकार और निर्वाचन आयोग द्वारा चलाया जा रहा मतदाता विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम इसी नींव को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। जब सरकारें जनता की बात सुनकर, लचीलापन दिखाकर निर्णय लेती हैं, तो यह न केवल शासन की संवेदनशीलता दर्शाता है बल्कि लोकतंत्र की जीवंतता का प्रमाण भी होता है। बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की व्यावहारिक समस्याओं और कुछ वर्गों की तकनीकी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम की समय सीमा को 11 दिसंबर 2025 तक बढ़ा दिया है। यह निर्णय इस बात का संकेत है कि वर्तमान सरकार पारदर्शिता, समावेशिता और जन सहभागिता में विश्वास रखती है, न कि तानाशाही रवैये में। सरकार पर यह आरोप लगते रहे हैं कि वह एसआईआर, जैसे कार्यक्रमों में अपनी मनमानी करती है, लेकिन अब जबकि समय सीमा बढ़ा दी गई है, यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार अपने सिद्धांतों और प्रक्रियाओं के प्रति ईमानदार है। साथ ही, यह निर्णय इस बात का भी प्रमाण है कि सरकार अपने कर्मचारियों की सुरक्षा और व्यवहारिक कठिनाइयों को गंभीरता से लेती है। यह जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं बल्कि देश के हर नागरिक की है। मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम किसी एक राजनीतिक दल या सत्ता पक्ष का नहीं, बल्कि पूरे देश की लोकतांत्रिक आत्मा की पहचान है। यदि आप देशभक्त हैं यदि आप लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं, तो यह आपका नैतिक कर्तव्य है कि आप आगे बढ़कर अपने और अपने परिवार के सभी सदस्यों के मतदाता विवरण की जांच करें। आवश्यक सुधार करें एवं सुनिश्चित करें कि कोई भी योग्य नागरिक मताधिकार से वंचित न हो। इस कार्यक्रम का विस्तार यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी नागरिक छूटने न पाए चाहे वह शहर का हो या ग्रामीण का चाहे वह युवा हो या बुजुर्ग, तकनीकी जानकारी रखता हो या नहीं, यह निर्णय केवल वंचित वर्गों को अधिकार दिलाने का माध्यम बनेगा बल्कि समाज में यह विश्वास भी पैदा करेगा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति की आवाज की कीमत है। यह समय है जब विपक्ष और आलोचक गन भी इस निर्णय की सराहना करें क्योंकि यह किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि राष्ट्रहित और जनहित में लिया गया निर्णय है। विशेष रूप से युवा वर्ग, शिक्षकों, समाज सेवाओं एवं ग्राम प्रधानों से यह अपेक्षा की जाती है कि घर-घर जाकर मतदाता जागरूकता फैलाएं और विशेष पुनरीक्षण कार्यक्रम को एक जन आंदोलन में बदल दें।
