संत कबीर नगर 03 दिसंबर 2025,
भारत एक प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राष्ट्र है, जहां संस्कार, मर्यादा, नैतिकता और बुजुर्गों का निर्णय सामाजिक आधार माना जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में डिजिटल माध्यमों पर अश्लीलता और अनैतिक कंटेंट की जो बाढ़ आई है, वह न केवल हमारी सांस्कृतिक अस्मिता को ठेस पहुंचा रही है, बल्कि युवाओं के मानसिक और नैतिक स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। फेसबुक, जो कभी संवाद, जानकारी और सामाजिक संपर्क का सशक्त माध्यम था, आज बड़े पैमाने पर अश्लीलता फैलाने का मंच बन चुका है। वीडियो, रील्स और पोस्टों के माध्यम से भड़काऊ और अनैतिक सामग्री तेजी से वायरल हो रही है। स्थिति यह है कि किशोरावस्था से लेकर प्रौढ़ तक इस अश्लीलता के जाल में फंसते जा रहे हैं। यह विडंबना ही है कि भारत जैसे देश में, जहां गंगा-जमुनी तहजीब, परिवार व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवन का अभिन्न हिस्सा माना जाता है, वहां खुलेआम विदेशी प्लेटफॉर्मों पर अश्लीलता परोसी जा रही है और साइबर विभाग एवं सरकार की चुप्पी निराशाजनक है। अब समय आ गया है कि भारत सरकार और साइबर सुरक्षा विभाग इस गंभीर विषय पर तत्काल कदम उठाए। फेसबुक जैसी कंपनियों को भारत के सांस्कृतिक एवं कानूनी मानकों के पालन हेतु बाध्य किया जाए। जो अकाउंट या फेसबुक पेज अश्लीलता फ्लेट हैं उन पर त्वरित कार्रवाई हो। नाबालिकों के लिए कंटेंट फिल्टरिंग और गार्जियन लाक जैसे फीचर्स अनिवार्य किए जाएं। शैक्षणिक संस्थानों में सोशल मीडिया के नैतिक प्रयोग पर जागरूकता अभियान बृहद स्तर पर चलाया जाए। भारत की नई पीढ़ी हमारे देश का भविष्य है यदि यही पीढ़ी मानसिक विकृति, पोर्नोग्राफी, और अश्लीलता के घर में चली जाएगी तो देश का भविष्य भी अंधकार में हो जाएगा। आने वाली पीढ़ियां निश्चित रूप से सवाल पूछेंगीं कि जब सोशल मीडिया के माध्यम से समाज को विकृत किया जा रहा था तब जिम्मेदार लोग क्या कर रहे थे। यह केवल एक संस्कृति या धर्म का मुद्दा नहीं है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा मानसिक स्वच्छता का मामला है। अगर समय रहते इस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया या इस डिजिटल प्रदूषण को नियंत्रित नहीं तो परिणाम भयावह होते जाएंगे। सरकार को चाहिए कि सोशल मीडिया पर नियंत्रण की ठोस नीतियां बनाकर विदेशी कंपनियों को भारत के नियमों के अधीन करें। जो कंपनी भारतीय संस्कृति और कानूनी मूल्य का सम्मान नहीं करती, उसका प्रवेश प्रतिबंध है या आर्थिक दंड का प्रावधान सरकार को अवश्य करना चाहिए। क्योंकि यह जनहित और राष्ट्रहित दोनों का विषय है अब की चुप्पी बात के लिए समाज को घातक साबित हो सकती है इसलिए अभी से ही सरकार को सोशल मीडिया के द्वारा फैलाई जा रही अश्लीलता पर रोक लगाया जाना अत्यंत आवश्यक है।
