विश्व मृदा दिवस के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) एवं कृषि विभाग बस्ती के संयुक्त तत्वाधान द्वारा आज एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया।


बस्ती – कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष दिलीप पांडेय ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों में मृदा स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना मृदा परीक्षण के महत्व को समझाना तथा पोषक तत्व प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों को प्रोत्साहित करना था। संयुक्त कृषि निदेशक राम वचन कनौजिया ने विश्व मृदा दिवस के दौरान अपना संबोधन लोक कहावतें स्वस्थ माटी स्वस्थ जीवन यही हमारी पहचान से शुरू किया। विभाग की लाभकारी योजना के बारे में जानकारी प्रदान की। जिला कृषि अधिकारी बाबू राम मौर्या अपने संबोधन में कहां की मिट्टी का स्वास्थ्य तभी सही होगा जब तक हम प्राकृतिक एवं जैविक आधारित उत्पादों का प्रयोग ही करें कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती के प्रभारी अधिकारी डॉ पी के मिश्रा ने विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस पर कृषकों को संबोधित करते हुए कहा कि इस वर्ष का थीम भ्मंसजील ैवपसे थ्वत भ्मंसजील ब्पजपमेश् यानी श्स्वस्थ शहरों के लिए स्वस्थ मिट्टी‘ पर आधारित है। जनपद के कृषि विभाग के मुखिया उपनिदेशक कृषि अशोक कुमार गौतम कार्यक्रम संबोधित करते हुए कहा कि जिले के विभिन्न विकास खंडों से आए बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसानों महिलाओं तथा युवा कृषकों ने भाग लिया। केंद्र की फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ प्रेम शंकर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मृदा स्वास्थ्य ही कृषि उत्पादन का आधार है। यदि मिट्टी संतुलित जैविक रूप से सक्रिय और पोषक तत्वों से समृद्ध होगी तभी किसान की आय में निरंतर वृद्धि संभव है केंद्र के शस्य वैज्ञानिक हरिओम मिश्रा अपने संबोधन में कहा कि किसानों को मृदा नमूना संग्रह की सही विधि को अपनाकर जैविक कार्बन पोषक तत्व संतुलन तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को जानना अतिआवश्यक है। जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में मृदा जब संरक्षण तकनीक जैसे मल्चिंग फसल चक्र हरी खाद एवं जैविक खादों के उपयोग पर जोर दिया गया। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ वी बी सिंह कार्यक्रम का संचालन करते हुए किसानों को नैनो यूरिया नैनो डीएपी एवं माइक्रो-न्यूट्रिएंट के संतुलित उपयोग करते हुए मृदा स्वास्थ्य ठीक करने का प्रशिक्षण दिया केंद्र के प्रसार वैज्ञानिक आर बी सिंह ने मृदा परीक्षा के को समझाते हुए किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेष जलाने से बचें जैविक पदार्थों को खेत में वापस लौटाएँ और हर वर्ष मृदा परीक्षण अवश्य करवाएँ। सहायक निदेशक मृदा परीक्षण जिला कृषि रक्षा अधिकारी बस्ती रतन शंकर ओझा ने कार्यक्रम में आए किसानों ने मृदा परीक्षण जैविक खेती माइक्रो-न्यूट्रिएंट प्रबंधन और उर्वरकों की प्रभावी मात्रा के बारे में प्रश्न पूछे जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया। कई किसानों ने यह भी बताया कि केंद्रीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला बस्ती एवं केवीके से उन्हें समय-समय पर मिलने वाली तकनीकी जानकारी से उनकी फसल उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ है कार्यक्रम के अंत में केंद्र की गृह विज्ञान वैज्ञानिक डॉ अंजलि वर्मा ने उपस्थित किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड तकनीकी पुस्तिकाएं एवं कृषि परामर्श सामग्री वितरित की गई। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए यह विश्वास व्यक्त किया गया कि कृषक समुदाय मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के लिए वैज्ञानिक तकनीकों को व्यवहार में लाए।

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