संत कबीर नगर 08 दिसंबर 2025,
भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जहां न्यायपालिका सर्वोपरि मानी जाती है, वहां न्यायिक प्रक्रिया के दौरान किसी भूमि पर कब्जा करना केवल नैतिक पतन नहीं, बल्कि कानून का खुला उल्लंघन है। दुर्भाग्यवश हाल के वर्षों में यह एक सुनियोजित प्रवृत्ति बनती जा रही है, जहां भूमाफिया, भ्रष्ट प्रशासनिक कर्मी और कुछ बिके हुए मीडिया तंत्र मिलकर अदालत के आदेशों को दरकिनार कर ज़मीनों पर जबरन कब्जा कर रहे हैं। भारतीय संविधान की धारा 129 और 215 के तहत उच्च न्यायालयों को अवमानना के विरुद्ध कार्यवाही करने का अधिकार प्राप्त है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर न्यायालय के विचाराधीन मामलों में हस्तक्षेप करता है, जैसे, कब्जा करना या निर्माण कार्य प्रारंभ करना तो यह न्यायालय की अवमानना माना जाता है। यह न केवल कानून की अवहेलना है, बल्कि लोकतंत्र के स्तंभों पर सीधा हमला है।
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के अनुसार किसी भी भूमि के स्वामित्व में बदलाव या कब्जे से पहले सक्षम अधिकारी से अनुमोदन लेना अत्यंत अनिवार्य है। विवादित भूमि पर नामांतरण या दाखिल खारिज तब तक नहीं किया जा सकता जब तक मामला न्यायालय में लंबित हो। इसके बावजूद कुछ लेखपाल और तहसील कर्मियों की मिली भगत से यह अवैध प्रक्रिया धड़ल्ले से चल रही है। कई मामलों में देखा गया है कि फिर दर्ज नहीं होती पुलिस मामला राजस्व का है बात कर पल्ला झाड़ लेती है aur pidit बार-बार और पीड़ित बार-बार न्याय की गुहार लगाता है। इससे आम नागरिकों का भरोसा व्यवस्था पर से उठने लगा है। जो चिंता का विषय है खासकर उत्तर प्रदेश के योगी सरकार में जहां सुशासन को महत्व दिया जाता है। मीडिया जो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है भूमाफियाओं के पक्ष में ही खड़े दिखाई देते हैं जबकि मीडिया को अन्य का विरोध करना चाहिए अगर मामला अदालत में है तो वहां निर्माण कार्य नहीं होने चाहिए, कुछ बैनर के अखबारों के प्रतिनिधियों का तो हाल ही है कि वह पत्रकारिता जगत पर ध्यान नहीं देकर कटबैठी बैठाने वाली जगह पर ध्यान ज्यादा देते हैं, तगड़ी विज्ञापनों के लिए और खबरें झूठी बनाने में तो बड़े माहिर होते हैं, अभी संत कबीर नगर का ही एक मामला ले लीजिए कुछ ही दिन पहले एक प्रतिष्ठित अखबार में साधु को नगर पालिका का ईओ बना दिया और ईओ को साधु बना दिया, जब तक आदमी अपने काम के प्रति वफादार नहीं होगा तब तक ऐसी गलतियां होती रहेगी और कानून का उल्लंघन होता रहेगा, लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से जनता को उम्मीद है, शायद ऐसा न हो, यह एक आदमी के ऊपर नहीं एक तरह से सामाजिक कुरीति बनती जा रही है। और कुछ कर्मचारी अपनी जेब में गर्म करके सरकार को बदनाम करते हैं और अदालत की अवमानना करते हैं। जिस पर सरकार को कड़ा रुखसत करना चाहिए जिससे आम जनमानस का विश्वास सरकार पर और गहरा हो सके।
