जाड़े में ठिठुरते गरीब, मौन सरकार और बंद आंखों वाला सिस्टम

संत कबीर नगर 03 जनवरी 2026,
देशभर में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। तापमान गिरता जा रहा है, लेकिन गरीब आदमी की तकलीफें बढ़ती जा रही हैं। फुटपाथ, झोपड़पट्टी और टूटी फूटी झुग्गियों में रह रहे लोग चादर से नहीं, मजबूरी से सर्द रातें काट रहे हैं। लेकिन सरकारें, प्रशासन और जनप्रतिनिधि तमाशबीन बन बैठे हैं।
जिस गरीब ने वोट देकर अपने नेता को चुनकर संसद और विधानसभा तक पहुंचाया, वह आज उसी गरीब की आवाज सुनने को तैयार नहीं। नेता एयर कंडीशन कमरों में बैठे मीटिंग कर रहे हैं, अफसर लोग चाय की चुस्कियों में योजनाओं की फाइलें उलट-पलट कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत से सब आंखें मूंद चुके हैं।
नगर पालिका और अन्य निकायों के पास संसाधन तो हैं, लेकिन वो भी गिने-चुने लोगों तक सीमित होकर रह गए हैं। न गर्म कपड़े हैं, न अलाव की व्यवस्था और न ही रैन बसेरों की सही स्थिति। कई जगह रैन बसेरे तो बने हैं, पर वहां इंसान से ज्यादा जानवर नजर आते हैं। अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि “बजट नहीं आया”, “तबादला एक्सप्रेस रुक गई है”। यानी अब अफसरों का काम सिर्फ तबादले और फाइलों तक सीमित रह गया है। शहरों में विकास सिर्फ कागजों पर हो रहा है और गांवों में ठंड से हर साल दर्जनों गरीब जान गंवा रहे हैं। प्रश्न यह है कि क्या लोकतंत्र में गरीब की भूमिका सिर्फ वोट देने तक सीमित रह गई है अगर उसके पास कोई मेडिएटर नहीं है तो ना तो नेताजी सुनेंगे ना तो अधिकारी जी। क्या संविधान सिर्फ अमीरों के लिए लिखा गया था? यह अधिकारियों को सिर्फ सुविधा पहुंचाए जाने के लिए लिखा गया था। देश अगर इसी दिशा में चला रहा तो सामाजिक असमानता की खाई और चौड़ी हो जाएगी। सरकार और स्थानीय निकायों को चाहिए कि वह हर वार्ड गांव और कस्बे में सर्दी से बचाव के लिए ठोस इंतजाम करें, रैन बसेरों को कभी पत्रकारों को बैठने का साधन बना दिया जाता है, तो कभी पत्रकारों से उसे खाली कर लिया जाता है, पत्रकार बंधुओ को बैठने के लिए कहीं भी ऐसी व्यवस्था नहीं है कि अलाव जलाया जा सके। रैन बसेरे की क्या स्थिति है यह सिर्फ अधिकारियों के औचक निरीक्षण के समय ही सत्य दिखाई देगी, फिर कहां लुप्त हो जाएगी राम जाने। सक्रिय जिलाधिकारी ने इस दिशा में कुछ ठोस कदम उठाए गरीबों को कंबल आदि विपरीत भी करवाया, जिसके लिए आमजनमानस उनकी अत्यंत प्रशंसा करता है, इसी तरह जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को भी चाहिए की हर वार्ड में अलाव जलवाने की व्यवस्था भयंकर ठंडी को देखते हुए करें तो गरीब एवं असहाय नागरिकों को राहत मिलेगी, विश्वासपात्र सूत्रों के अनुसार अक्सर देखने में आ रहा है की लड़कियां कुछ चिन्हित जगह पर ही नगर पालिका के लोगों द्वारा गिराई जाती है जिससे आम जन समुदाय उससे कोई फायदा नहीं उठा पाता। समाज के अंतिम व्यक्ति तक गर्म कपड़े कंबल एवं अलाव की व्यवस्था के साथ-साथ अन्य सहयोग भी पहुंचे जिससे लोकतंत्र का यह चेहरा धीरे-धीरे संवेदनहीनता की पराकाष्ठा से बच जाए।

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