उप जिलाधिकारी और जिलाधिकारी के बाद आयुक्त तक पहुंची शिकायत, फिर भी कार्रवाई शून्य; जीरो टॉलरेंस नीति पर उठे सवाल

बस्ती,तहसील रुधौली के ग्राम डुमरी में सार्वजनिक रास्ते एवं खनंदक की भूमि पर कथित रूप से स्थापित मोबाइल टावर को लेकर ग्रामीणों की शिकायतें अब मंडलायुक्त बस्ती तक पहुंच चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

ग्राम डुमरी निवासी प्रेम नारायण सिंह द्वारा मंडलायुक्त बस्ती को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि गाटा संख्या 411, रकबा 0.299 हेक्टेयर में दर्ज खडंक की भूमि तथा गाटा संख्या 408 में दर्ज सार्वजनिक रास्ते की भूमि पर अवैध रूप से मोबाइल टावर स्थापित किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि मामले की शिकायत पहले उप जिलाधिकारी और जिलाधिकारी स्तर पर भी की जा चुकी है, लेकिन अब तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया।

शिकायत के अनुसार, उपजिलाधिकारी के निर्देश पर हुई पैमाइश में राजस्व विभाग की टीम ने रास्ते की भूमि पर टावर निर्माण पाए जाने की रिपोर्ट दी थी। इसके बावजूद टावर हटाने की दिशा में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि कुछ लोगों ने निजी लाभ के लिए टावर कंपनी को गुमराह कर टावर स्थापित कराया और उससे आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि विरोध करने पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई थी, जिसके बाद तत्कालीन लेखपाल हबीबुल्लाह द्वारा पूरे घटनाक्रम को लेकर संबंधित थाने में मुकदमा भी पंजीकृत कराया गया था, लेकिन उसके बाद भी मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और कथित अतिक्रमण आज भी बरकरार है।

मामले में राजस्व विभाग द्वारा धारा-67 के तहत कार्रवाई किए जाने के बावजूद कब्जा नहीं हटाए जाने से ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि जब उप जिलाधिकारी और जिलाधिकारी स्तर पर शिकायतों के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला, तब मजबूर होकर मंडलायुक्त बस्ती से हस्तक्षेप की मांग की गई। हालांकि, वहां तक मामला पहुंचने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

लगातार शिकायतों, राजस्व विभाग की रिपोर्ट और मुकदमा दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई न होने से प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के जमीनी क्रियान्वयन पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सार्वजनिक भूमि पर हुए कथित अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासनिक आदेशों और कानूनी कार्रवाई का भी असर नहीं दिख रहा है, तो भ्रष्टाचार और अवैध कब्जों के खिलाफ सरकार की मंशा धरातल पर कमजोर पड़ती नजर आ रही है।

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