रुधौली थाना क्षेत्र के मरवाटिया आसरे गांव का मामला, कार्रवाई न होने से पीड़ित परिवार में दहशत
बस्ती जनपद के रुधौली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम मरवाटिया आसरे में जमीन विवाद अब बड़ा तनाव का कारण बनता जा रहा है। पीड़ित दलित परिवार ने गांव के कुछ लोगों पर जबरन जमीन कब्जाने, जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने, गाली-गलौज करने और पुलिस द्वारा समय रहते कार्रवाई न किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है।

पीड़ित राम फेर पुत्र स्वर्गीय सोमई ने थाना रुधौली में दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि गांव के ही राम बुझारत, राम ललित, रामशुभग पुत्रगण राम लगन तथा सचिन पुत्र स्वर्गीय रामस्वारथ एक राय होकर उनकी जमीन पर जबरन नींव खोदकर पिलर डालने का कार्य कर रहे थे। पीड़ित परिवार का कहना है कि उक्त भूमि पर उनका वैधानिक अधिकार है, लेकिन विपक्षी पक्ष दबंगई के बल पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है।

पीड़ित के अनुसार जब उन्होंने निर्माण कार्य का विरोध किया तो विपक्षियों ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए मां-बहन की भद्दी-भद्दी गालियां दीं। इतना ही नहीं, विरोध करने पर जान से मारने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि उन्हें लगातार “धोबी जाति” कहकर सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जा रहा है, जिससे पूरे परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
मामले को लेकर पीड़ित पक्ष ने थाना अध्यक्ष रुधौली को लिखित शिकायत देकर तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। शिकायत के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार ने चौकी प्रभारी चंद्रप्रकाश सिंह से वार्ता कर पूरे प्रकरण से अवगत कराया। अधिवक्ता ने आशंका जताई कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो गांव में शांति व्यवस्था बिगड़ सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि मामले की सूचना यूपी-112 पर भी दी जा चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य लगातार जारी है।
पीड़ित पक्ष के अनुसार चौकी प्रभारी द्वारा दिया गया बयान बेहद गैरजिम्मेदाराना और चिंता बढ़ाने वाला था। अधिवक्ता का आरोप है कि चौकी प्रभारी ने कहा कि “चार बार मौके पर जा चुके हैं, क्योंकि मामला जमीनी विवाद का है इसलिए एसडीएम साहब को कागजात दिखाइए।” इसके बाद कथित तौर पर यह भी कहा गया कि “अगर मारपीट हो जाए तो बताइए, तत्काल पुलिस पहुंच जाएगी।”
चौकी प्रभारी के इस बयान को लेकर अब गांव में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि जब पुलिस प्रशासन पहले से संभावित विवाद की जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कदम नहीं उठा रहा, तो इससे दबंग पक्ष के हौसले और बुलंद हो रहे हैं। परिवार का आरोप है कि प्रशासन की निष्क्रियता किसी बड़े विवाद या अप्रिय घटना को जन्म दे सकती है।
ग्रामीणों के बीच भी इस मामले को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष तरीके से जांच कर समय रहते कार्रवाई करे तो विवाद को बढ़ने से रोका जा सकता है।
पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए तथा निर्माण कार्य को तत्काल रुकवाकर परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
