मनरेगा शिकायतों पर प्रशासन की सख्ती, छतरियां और आमबारी ग्राम पंचायतों में जांच के आदेश

मनरेगा शिकायतों पर प्रशासन की सख्ती, छतरियां और आमबारी ग्राम पंचायतों में जांच के आदेश

रुधौली,बस्ती। विकासखंड रुधौली की ग्राम पंचायत छतरियां और आमबारी (पैड़ा) में मनरेगा कार्यों को लेकर लगातार सामने आ रही शिकायतों के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। फर्जी हाजिरी, संदिग्ध भुगतान और कार्यों में अनियमितताओं से जुड़ी खबरों के प्रकाशन तथा सोशल मीडिया पर उठे सवालों के बाद खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) रुधौली ने मामले की जांच के निर्देश जारी किए हैं।खंड विकास अधिकारी द्वारा जारी आदेश में संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि दोनों ग्राम पंचायतों में संचालित मनरेगा कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाए। जांच टीम में सहायक विकास अधिकारी (आईएसबी), अवर अभियंता एवं तकनीकी सहायक को शामिल किया गया है। अधिकारियों को कार्यस्थल की नवीनतम फोटो, अभिलेखीय साक्ष्य और जांच आख्या के साथ तीन दिवस के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत छतरियां में पिछले कई दिनों से मनरेगा कार्यों को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि कुछ कार्यों में मौके पर मौजूद मजदूरों की संख्या और मस्टररोल में दर्ज हाजिरी के बीच भारी अंतर है। वहीं पोखरा खुदाई सहित अन्य कार्यों में फर्जी उपस्थिति दर्ज कर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।दूसरी ओर ग्राम पंचायत आमबारी (पैड़ा) में भी मनरेगा कार्यों के क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई योजनाओं में पारदर्शिता का अभाव दिखाई देता है और यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो अनेक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।लगातार सामने आ रही शिकायतों ने ग्रामीण विकास विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी बहस छेड़ दी है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर शिकायतों के निस्तारण में अपेक्षित तेजी अक्सर दिखाई नहीं देती। ऐसे में दोनों ग्राम पंचायतों में कराई जा रही जांच को लोग प्रशासन की गंभीरता की कसौटी मान रहे हैं।अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न हुई तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, तो इससे मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में जनता का विश्वास मजबूत होगा। वहीं यदि मामला केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहा, तो भ्रष्टाचार को लेकर उठ रहे सवाल और गहरे हो सकते हैं।फिलहाल प्रशासन द्वारा जांच के आदेश जारी होने के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और ग्रामीण रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं।

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