अनीता डिस्टलरी ने प्रेस नोट जारी कर कहा – 2021 से कंपनी के नाम पर हो रही जमीन खरीद, लोक सुनवाई 20 फरवरी 2025 को हुई; ZLD तकनीक से होगा संचालन
बस्ती। रुधौली क्षेत्र में लग रहे एथेनॉल प्लांट को लेकर चल रहे विरोध और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रांतियों के बाद कंपनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मालिक सुधीर जायसवाल ने सफाई दी है। कंपनी ने ‘जनहित सूचना एवं तथ्य पत्रक’ जारी कर परियोजना से जुड़े सवालों के जवाब दिए।
कंपनी का दावा: शुरुआत से ही स्पष्ट था एथेनॉल प्लांट
कंपनी ने कहा कि वर्ष 2021 में पहली भूमि रजिस्ट्री से लेकर अंतिम रजिस्ट्री तक सभी जमीन ‘अनीता डिस्टलरी प्रा. लि.’ के नाम पर ही खरीदी गई है। ‘Distillery’ शब्द से ही स्पष्ट है कि यह एथेनॉल उत्पादन इकाई है। भूमि खरीद की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से और विक्रेताओं की सहमति से पूरी की गई।
लोक सुनवाई और पर्यावरणीय अनुमति
कंपनी के अनुसार परियोजना की विधिवत लोक सुनवाई 20 फरवरी 2025 को बस्ती के तत्कालीन सीआरओ और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी की अध्यक्षता में हुई थी। सूचना 30 दिन पहले दो प्रमुख अखबारों में प्रकाशित की गई थी। सुनवाई में स्थानीय किसान, महिलाएं और नागरिक मौजूद थे। सभी को परियोजना की जानकारी दी गई और सहमति के बाद ही आगे की कार्रवाई हुई।
प्रदूषण और पानी को लेकर सफाई
कंपनी ने कहा कि प्लांट Zero Liquid Discharge यानी ZLD तकनीक पर आधारित होगा। इसका मतलब है कि फैक्ट्री से कोई भी दूषित जल बाहर नहीं छोड़ा जाएगा। इस्तेमाल हुआ पानी ट्रीट करके उत्पादन में ही दोबारा उपयोग किया जाएगा। निर्माण पर्यावरण मंत्रालय और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी मानकों के अनुसार किया जा रहा है।
कंपनी ने सोशल मीडिया पर वायरल ‘1 लीटर एथेनॉल में 10,000 लीटर पानी’ के दावे को भ्रामक बताया। कहा कि आधुनिक प्लांट न्यूनतम पानी का उपयोग कर उसे रीसायकल करते हैं। एथेनॉल मुख्यतः सरप्लस अनाज और मक्का से बनाया जाएगा, जिससे किसानों की फसल का अच्छा मूल्य मिलेगा।
रोजगार और विकास का वादा
कंपनी ने बताया कि निर्माण कार्य लगभग 75% पूरा हो चुका है। प्लांट से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष करीब 200 लोगों को रोजगार मिलेगा। कंपनी का संकल्प है कि पर्यावरण संरक्षण के सभी नियमों का पालन होगा, किसानों की आय बढ़ेगी, स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और बस्ती के औद्योगिक विकास में योगदान होगा।
कंपनी ने लोगों से अपील की कि किसी भी वायरल पोस्ट पर भरोसा करने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की जांच करें। विकास परियोजनाओं का मूल्यांकन तथ्यों और वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर होना चाहिए, न कि अफवाहों के आधार पर।
